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सर्दियों में घर पर ही उगाएं बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक सब्जियां

सर्दियों में घर पर ही उगाएं बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक सब्जियां

सर्दियों का मौसम रंग-बिरंगी, हरी पत्तेदार, स्वादिष्ट और ताजा सब्जियों का मौसम होता है। इन दिनों की एक और खास बात यह है, कि इन दिनों में सब्जियां जल्दी खराब भी नहीं होती हैं। इन दिनों मेथी, पालक, धनिया, सरसों के साग से लेकर गाजर, मूली, बीन्स, मटर, शकरकंद, चेरी टमाटर, ब्रोकली और हरी प्याज खूब पसंद की जाती है। सब्जियां खरीदने के लिए जब भी हम बाजार जाते हैं, तो हमारे दिमाग में एक चीज जरूर आती है। वह यह कि हम कहीं इन सब्जियों का उत्पादन केमिकल आदि डालकर तो नहीं किया गया है। ऐसे में हम उन सब्जियों को पकाने में जरा परहेज करते हैं। आज हम आपको बताएंगे, कि अपने घर की छोटी सी बालकनी या फिर किचन गार्डन में आप कौन-कौन सी सब्जियां उगा सकते हैं और वह भी एक दम बिना किसी केमिकल का इस्तेमाल किए।

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चेरी टमाटर

टमाटर एक ऐसी सब्जी है, जो लगभग बाकी सभी सब्जियों में डाली जाती है, टमाटर डालते ही सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है। टमाटर की सब्जी को लगभग हर मौसम में उगाया जा सकता है और इसका उत्पादन आसानी से हो जाता है। लेकिन सर्दियों में इसे उगाना और भी आसान है। बाजार में भी टमाटर की बहुत मांग है। इसे अपने घर की छत, गार्डन या बालकनी में उगा सकते हैं। आप चाहें तो इसका बना-बनाया प्लांट ऑर्डर कर सकते हैं या फिर बीज समेत अपने गार्डन में ताजा टमाटर उगाएं। सर्दियों में लाल टमाटर सूप और सैलेड के तौर पर खूब इस्तेमाल होता है। इसके अलावा अगर आप पारंपरिक टमाटर की खेती नहीं करना चाहते हैं, तो आप अपनी बालकनी गार्डन में चेरी टमाटर याने की छोटे-छोटे दिखने वाले टमाटर का उत्पादन भी कर सकते हैं। यह टमाटर सूप आदि के लिए भी अच्छा रहता है और अगर आप इसका इस्तेमाल सब्जी में करते हैं, तो यह सब्जी का स्वाद काफी बढ़ा देता है।

प्याज

भारतीय घरों में शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जब प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। प्याज के बिना सब्जियों में स्वाद लाना जरा मुश्किल हो जाता है। इसकी खेती या गार्डनिंग करने के लिए सर्दियों का समय उचित रहता है। आप चाहें तो मिट्टी, कंपोस्ट, खाद, कोकोपीट डालकर गमले में प्याज का बल्ब लगा सकते हैं। यदि किचन में प्याज की जड़ पड़ी हैं, तो आप सीधा पानी का एक जार तैयार करके भी हरी प्याज का उत्पादन ले सकते हैं। ये किचन में इस्तेमाल होने वाली सबसे सामान्य सब्जी है, जो अब घर बैठे पर कम मेहनत में आपको ताजा मिल जाएगी। सर्दियों में इसकी ग्रोथ भी अच्छी होती है, इसलिए अपनी किचन गार्डन में ये सदाबहार सब्जी जरूर लगाएं।

गाजर-मूली

गाजर का हलवा खाना चाहते हो या फिर मूली के पराठे दोनों के लिए ही गाजर और मूली होना बेहद जरूरी है। आजकल बाजार में गाजर और मूली में सबसे ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इन्हें आप घर पर ही उगा सकते हैं, ठंड और शीतलहर के मध्य इन सब्जियों की तेजी से ग्रोथ होती है। इन्हें घर पर उगाने के लिए गमले की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। घर बेकार पड़ी बाल्टी या टब में भी इन जड़ वाली सब्जियों को उगा सकते हैं। एक बार बुवाई के बाद ही ये सब्जियां 40 से 60 दिन के अंदर अच्छा-खासा उत्पादन देने लगती हैं।

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हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी सब्जियों को घर पर उगाना सबसे ज्यादा आसान होता है। इनमें आपको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है और एक बार बीज डालने के बाद यह सब्जियां अपने आप ही उग जाती हैं। पालक, मेथी, धनिया, सरसों का साग जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां ही सर्दियों की शान हैं। जाने कितने व्यंजन इन सब्जियों से पूरी सर्दियों में बनते हैं। पते की बात तो ये है, कि सबसे ज्यादा आयरन और न्यूट्रिएंट्स इन्हीं पत्तेदार सब्जियों में होते हैं। इसलिए फटाफट इनके सीड्स ऑइनलाइन मार्केट या किसी नर्सरी से मंगवाकर गार्डनिंग चालू कर दीजिए। आप चाहें तो इन देसी पत्तेदार सब्जियों के अलावा विदेश की स्विस चार्ड, रोलाई, केल, एशियाई साग भी उगा सकते हैं।

बीन्स-मटर

हालांकि बींस और मटर की खेती करना जरा सा मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी आप इसकी दो अलग-अलग वैरायटी बेलदार और झाड़ीदार में से किसी एक का चुनाव करके अपने घर में जगह के अनुसार उत्पादन शुरू कर सकते हैं। इन्हें कम दाम में घर पर ही उगा सकते हैं, इस काम के लिए दिसंबर से लेकर फरवरी सबसे अच्छा समय होता है।
इन व्यवसायों से आप शहरों के दूषित पर्यावरण से दूर गांव में भी कर सकते हैं अच्छी कमाई

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शहर की भागमभाग के साथ नौकरी और पूरे दिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर कार्य करना अब ऐसे में जिंदगी में चैन व शांति नहीं मिल पाती है। इस वजह से लोगों का रुझान गांव वापसी की तरफ बढ़ता जा रहा है क्योंकि गाँव की शुद्ध वायु में अजीब सा चैन, सुकून और आमदनी भी होती है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन जीवन में कृषि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह केवल कृषकों का ही कार्य नहीं होता है यदि कोई भी व्यक्ति चाहे तो स्वयं के घर पर भी बागवानी कर सकता है। इस प्रकार वह भी अर्बन कृषि की श्रेणी में आता है, हालाँकि देश की बहुत बड़ी जनसंख्या कृषि पर ही आश्रित रहती है। परंतु यदि हम बात करें कृषि उत्पादों की तो इनपर पूर्ण विश्व आश्रित रहता है। भारत में उत्पादित कृषि उत्पाद वर्तमान में विदेशों में निर्यात हो रहे हैं, याद कीजिए कोरोना महामारी का वो दौर जब प्रत्येक व्यवसाय-नौकरी बिल्कुल बंद हो गई थी। उस भयानक घड़ी में सिर्फ खेती व किसानों ने ही देश की अर्थव्यवस्था को संभाला था। उस बात को देशवाशियों ने समझा एवं कृषि के महत्त्व को भी जान पाए हैं। इसलिए शहरों की थकानयुक्त जीवन को पीछे छोड़ खेती-किसानी संबंधित किसी ना किसी गतिविधि में शामिल हो गए हैं। यह सब मामला आज तक सुचारु है, बहुत सारे लोग गांव में आकर कृषि एवं कृषि व्यवसाय से जुड़ना चाहते हैं। परंतु यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किस व्यवसाय में सर्वाधिक सफलता एवं बेहतरीन आमदनी हो सके। इसलिए आज हम उन कृषि व्यवसायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको ना केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी बेहतरीन आमदनी कराएगा।

ऑर्गेनिक फल-सब्जियों का उत्पादन कर कमाएं मुनाफा

भारत की मृदा में उत्पादित फल-सब्जियों की माँग देश ही नहीं विदेशों में भी हो रही है। रसायनों से उत्पादित किए गए फल-सब्जिओं से स्वास्थ्य को काफी हानि पहुंच रही है। इसलिए भारत एवं विश्व की एक बड़ी जनसँख्या जैविक फल व सब्जियों का सेवन करती है। बतादें, कि भविष्य में जैविक फल-सब्जियों की मांग और ज्यादा होगी, इसलिए आप जैविक फल-सब्जियों के उत्पादन के साथ-साथ शहरों में इसका विपणन व्यवसाय कर सकते हैं। इस काम के लिए आपको सरकार से ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एवं FSSAI से भी एक प्रमाणपत्र लेना होगा। उसके उपरांत यदि आप अपने ऑर्गेनिक फल एवं सब्जियों को विदेश में भी निर्यात कर पाएंगे। खुशी की बात यह है, कि ऑर्गेनिक कृषि हेतु सरकार द्वारा बहुत सारी योजनाओं के माध्यम से परीक्षण, तकनीकी सहायता एवं आर्थिक मदद प्रदान करते हैं।

पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से होगा खूब फायदा

स्वास्थ्य के प्रति लोग सजग एवं जागरूक होते जा रहे हैं। बेहतर स्वास्थ्य हेतु प्रोटीन को आहार में शम्मिलित करना अत्यंत आवश्यक है। दूध इसका सबसे बेहतरीन एवं प्राकृतिक स्त्रोत है। देश में दूध-डेयरी का व्यवसाय अच्छा खासा चलता है, साथ ही शहरों में गाय-भैंस के दुग्ध से निर्मित सेहतमंद उत्पादों की बेहद मांग होती है। गांव में सामान्यतः पर्यावरण स्वच्छ एवं शुद्ध रहता है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में पशु व डेयरी का कार्य बेहद ही आसान होता है। पशुपालन के लिए काफी जगह होना बहुत ही जरूरी है, इसलिए आप इच्छानुसार भैंस, बकरी एवं गाय पालन एवं दूध उत्पादन कर सकते हैं। साथ ही, स्वयं की दूध प्रोसेसिंग व डेयरी फार्म भी आरंभ कर सकते हैं, लोग स्वयं आकर आपसे दूध खरीदेंगे। यदि आप अपना ब्रांड बनाकर दूध एवं इससे निर्मित उत्पादों की आपूर्ति कर सकते हैं।

जड़ी बूटियों की खेती से होगा लाभ

कोरोना महामारी के उपरांत लोगों ने आयुर्वेद की तरफ अपना रुझान किया है। लोगों का आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रति विश्वास और बढ़ गया है। वर्तमान में लोग बीमारियों में सुबह-शाम दवाईयां लेने की जगह औषधियों एवं जड़ी-बूटियों का उपयोग करने लगे हैं। बहुत सारी बड़ी-बड़ी कंपनियां औषधियों एवं जड़ी-बूटियों से देसी दवाओं के साथ सेहतमंद खाद्य उत्पाद निर्मित कर विक्रय कर रही हैं। भारत की उच्च स्तरीय दवा कपंनियां हिमालया हर्ब्स एवं पतंजली जैसी अन्य भी आयुर्वेद की दिशा में कार्य करती हैं।


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इन कंपनियां द्वारा किसानों के साथ कांट्रेक्ट किया जाता है। खेती पर किये गए व्यय को आपस में विभाजित कर कृषकों से समस्त जड़ी-बूटी अथवा औषधी क्रय करली जाती है। औषधीय कृषि की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि इसमें खर्च नाममात्र के बराबर होता है। किसान चाहें तो ऊसर या बंजर भूमि पर भी औषधियां उत्पादित कर सकते हैं। बीमारियों के सीजन में औषधीय कृषि एवं इसकी प्रोसेसिंग का व्यवसाय भी किसानों को कम लागात में अत्यधिक मुनाफा दिला सकता है।